एमी,


बाहर की ठंड अब कुछ कम हो चली है फरवरी का महीना चल रहा है और लोग इश्क़ की खुमारी में डूबे हुए हैं। यूँ तो मुझे कभी नहीं लगा एमी कि इश्क़ का कोई तय वक़्त हो सकता है मगर फिर यूँ भी सोचता हूँ कि अगर एक दिन को भी पूरी दुनिया सिर्फ इश्क़ में झूम उठे तो उस दिन ये दुनिया कितनी सुंदर होगी न।  

एमी ये सवाल तो सदियों से चला आ रहा है कि इश्क़ है क्या और कोई भी कभी उसका निश्चित उत्तर न पा सका है लेकिन मुझे लगता है एमी कि इश्क़ एक मानसिक अवस्था है जिसमें या तो आप होते हैं, या नहीं होते। अगर हुए तो जेठ की दुपहरी भी जाड़े की नरम धूप सी लगती है और जाड़े की सनसनाती हवा भी किसी के आलिंगन सी, रात के अंधेरे डराने के बजाए मन को गुदगुदाते हैं और पसीना भी इत्र सा महकता रहता है और अगर इश्क़ में नहीं हुए तो दुनिया की तमाम सुंदरता भी मन को कुरूप और कसैली ही लगती है। दिन के उजाले भी काटने को दौड़ते हैं, फागुन का मंद-मंद बहता पवन भी चुभता है और सावन की पहली फुहार भी आपको परेशान करने की कुदरत की साजिश ही मालूम पड़ती है। 

एमी, इश्क़ भी अजीब है न। अब देखो न इश्क़ में पड़ा हुआ इंसान किसी से नफरत ही नहीं कर पाता, उनसे भी नहीं जिसने उसे ठेस पहुंचाई हो। मुझे लगता है एमी कि इश्क़ में दुनिया केवल सुंदर ही दिख सकती है। क्रोध, पीड़ा, घृणा की क्या मजाल कि वो एक दूसरे की बाहों में घुल रहे आशिकों के बीच आ जाए। क्या एक दूसरे की छाती से लगकर उनकी रुकती, बढ़ती धड़कनों को सुनते हुए दुनिया की कोई भी चिंता पास फटक सकती है? क्या एक दूसरे को चूमते हुए होंठ किसी को भी भला-बुरा कह सकते होंगे? क्या अपने वजूद से आगे अपने इश्क़, अपने प्रेमी को रखने वाला इंसान दुनिया में किसी का भी यकीन तोड़ सकता है? मुझे तो ये मुमकिन नहीं लगता एमी। इश्क़ में होते हुए तो यकीनन नहीं...

ख़ैर तुम कहोगी कि सिर्फ कोरी लफ़्फ़ाज़ी करते रहते हो इस ख़याल से, इस ख़त के साथ तुम्हें भेजने को गुलाब लाया तो ये ख़याल भी साथ हो चला कि फूल तो सभी सुंदर ही होते हैं फिर गुलाब ही को प्रेम का प्रतीक क्यों माना गया होगा। फिर उसका जो जवाब पाता हूँ वो तुम्हें लिख रहा हूँ। क्या इस दुनिया मे अपनी मुहब्बत को पा लेना उस काँटे भरे पौधे से फूल चुराने सरीखा नहीं है? ज़िन्दगी की जद्दोजहद भरे काँटे और उस बीच मन को मोहता, खुशबू से भरा, कोमल और सुंदर, खिलखिलाता वो फूल... इससे बेहतर मुहब्बत का प्रतीक क्या होता भला।  अब देखो न इश्क़ ने गुलाब को उन कांटों की नकारात्मकता के बीच भी कितना सुंदर, खुशबूदार, मनमोहक और कोमल बना रखा है। 

इस ख़त के साथ भेजे गए गुलाब और इश्क़ की ख़ुशबू को सम्भाल रखना। ऐसा करोगी न एमी, कर सकोगी क्या?


तुम्हारा 

इलोन


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तस्वीर - कहीं इंटरनेट से

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