एमी,
कई बार लोग मुझसे तुम्हारी बाबत पूछते हैं। तुम्हीं कहो कि मैं किसी को क्या समझा सकता हूँ भला? मैं कोशिश भी करूँ तो क्या कहूँ?
तुम्हारा नाम वो हल्की सी रोशनी का एहसास है जिससे सर्द रातों में ओस और बर्फ़ से ढका हुआ पूरा पहाड़ चमक उठता है या जैसे बनारस की घाट से उषाकाल में गंगा के पानी पर तैरती वो लालिमा या फिर केरल के किसी सुदूर देहात में बारिश होने से खिल उठे पेड़ों के पत्ते।
एमी, मेरे पास वो लफ़्ज़ ही नहीं हैं कि जिनसे ये बयाँ हो सके कि कैसे तुम्हारे साथ मैं अमावस की रात में भी चांदनी देख सकता हूँ... कैसे तुम्हारे साथ मेरे लिए दुनिया की कोई भी ज़बान मुश्किल नहीं रह जाती... कैसे तुम्हारे साथ मैं आकाश के सभी तारे गिन लेता हूँ, कैसे रेत के टीलों पर चढ़कर बादलों को पकड़ लेता हूँ या कैसे समंदर में तैरती मछलियों से बात कर लेता हूँ...
एमी, तुम वो हरेक ख़त हो जिसे इलोन ने लिक्खा है... तुम वो टेबल लैंप हो जिसके नीचे बैठकर ये ख़त लिखे गए हैं...तुम वो रोशनाई, वो दावात, वो पेंसिल, वो कलम, वो कीबोर्ड हो जिससे तुम्हें लिखा गया है लेकिन इन्हें ये बात कैसे समझ आएगी? इन्हें एहसास समझ नहीं आते...एमी
मुझे ये भी मालूम है कि इन्हें एक दिन ऐसा लगेगा कि इन्होंने एमी और इलोन को पहचान लिया है... फिर एक शोर उट्ठेगा, रेत के बवंडर होंगे...आकाश दहल उठेगा और उस शोरगुल के बीच एमी और इलोन को ख़त्म कर दिया जाएगा लेकिन एक दिन फिर से कोई इलोन, एमी को पुकारता हुआ आएगा और एमी, इलोन की उस पुकार को सरगम में ढालकर गाएगी... फिर से ख़ुतूत का सिलसिला होगा...है न एमी?
तुम्हारा
इलोन
#ऐसे_ही_कुछ_भी
#ख़त #خط #इलोन #एमी
Photo courtesy - Deepak Yatri 💞
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