एमी,
इन दिनों कई ख़त तुम्हारे नाम लिखे लेकिन फिर उन्हें पोस्ट नहीं किया। जाने क्या है जो कभी कभी डराता है मुझे...जब बहुत बातें इकट्ठी हो जाती हैं तो मैं बोल नहीं पाता एमी। नहीं, तुमसे भी नहीं... सारी बातें सीने में उलझ कर रह जाती हैं। मैं हड़बड़ाहट महसूस करने लगता हूँ, मेरा सीना ज़ोर ज़ोर से उछलने लगता है और मैं कुछ नहीं बोल पाता, कुछ भी नहीं।
इन दिनों मैं बीमार भी रहा एमी, लेकिन मर सकूँ इतना सुकून इकट्ठा नहीं कर पाया, फिर ज़िन्दगी में तुमसे एक बार मिलने की ख्वाहिश ने ही शायद ज़िन्दगी को साँसे लौटा दी।
ख़ैर, जानती हो एमी,आज अमृता का जन्मदिन है, हाँ वही "वारिश शाह" वाली अमृता। हां वही "अदालत" वाली अमृता जिसकी नायिका के हाथ का स्पर्श सालों बाद भी नायक के कोट के जेब में रह जाता है। हमारा भी तो कितना कुछ एक दूसरे के पास है न एमी? हमारे आँसू, हमारा लम्स, हमारे बोसे कितना कुछ?
पता है एमी, अमृता कहती हैं के " प्रेम में पड़ी स्त्री को तुम्हारे साथ सोने से ज़्यादा अच्छा लगता है तुम्हारे साथ जगना"। मैं तो कहता हूँ एमी के पुरूष को भी प्रेम में जगना ही अच्छा लगता है। हालाँकि मुझे नहीं मालूम के ऐसा हर पुरुष को लगता है या फिर वो मेरे अंदर की स्त्री है जिसे ये अच्छा लगता है। जो भी हो एमी, लेकिन मैं भी तुम्हारे साथ महीनों चाँद को घटते बढ़ते देख सकता हूँ, मुझे भी सुब्ह को तुम्हारे साथ सूरज को लाल कपड़ों में तैयार करना अच्छा लगेगा। मैं भी तुम्हारे साथ जगती हुई रातों में किसी रोज़ सारे तारे गिन लेना चाहता हूँ। इन सबों के बीच अगर मैं किसी दिन सोना भी चाहता हूँ तो केवल इसलिए के सुब्ह तुमसे पहले उठकर तुम्हें सोता हुआ निहार सकूँ। तुम्हारी ज़ुल्फें जब तुम्हें सोते हुए तंग करें तो मैं हँसूँ और फिर उन्हें हल्की चपत लगाते हुए उसे तुम्हारे कानो के पीछे ले जाकर छोड़ दूँ। मैं सोना भी चाहता हूँ तो इसलिए के तुम मेरी हाथ की चाय से उठा करो और अगर मैं साथ सोना भी चाहता हूँ तो इसलिए के उसके बाद कभी उठे ही नहीं और इस बेरहम ज़िन्दगी में कोई अकेला जागता न रह जाए...
एमी जाने किस रोज़ हम प्रेम में साथ जग पाएंगे और जाने किस रोज़ हम प्रेम में सो जाएँगे.
तुम्हारा
इलोन
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